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मछुआरा जाति की मसीहा महारानी राशमोनी | KashyapSamaj.com


 मछुआरा जाति की मसीहा महारानी राशमोनी | KashyapSamaj.com


महारानी राशमोनी (राशमणि) का जन्म 28 सितंबर , 1793 को बंगाल के एक गरीब कैवर्त / केवट ( बंगाली मछुआरा जाति ) परिवार में जन्म हुआ। गरीबी के कारण उनकें पिता ने राशमोनी जी का विवाह एक विदुर जमींदार राजचंद्र दास से कर दिया । राशमोनी जी एक बहुत सुंदर व बुद्धिमान कन्या था। रामचंद्र दास एक खुले दिमाग के व्यक्ति थे के उन्होंने राशमोनी जी को उनके व्यापार में हाथ बंटाने की अनुमति दी हुई थी। परंतु समय को कुछ और ही मंजूर था , राशमोनी के पति राजचंद्र दास की आकस्मिक निधन हो गया , जिससे उनके पूरे परिवार व व्यापार का भार महारानी के ऊपर आ गया।


rani rashmoni
महारानी रासमणि 


पति की मृत्यु के बाद महारानी ने बहुत से परोपकारी काम जारी रखे , जिनमें बाबू घाट, बेलियाघाटा नहर का निर्माण और शहर के नए क्षेत्र का बसाव , प्याऊ, वृद्धआश्रम निर्माण इंडियन नेशनल लाइब्रेरी,हिंदू कॉलेज कोलकाता आदि का निर्माण कराया । 


इनके पति के सहयोगी रहे समाज सुधारक राजा राम मोहन राय के साथ मिलकर समाज सुधार के विभिन्न कार्य जैसे बाल विवाह, सती प्रथा व बहुविवाह के विरुद्ध आवाज उठाई। 


मछुआरा समाज के लिए भी इन्होंने बहुत से प्रमुख कार्य किए जिनके लिए महारानी राशमोनी को आज भी याद किया जाता हैं । 


सन् 1847 में उद्योगपति द्वारकानाथ टैगोर बंगाल छोड़ कर लंदन चलें गए पर जाने से पहले सुंदरबन का एक बड़ा क्षेत्र रानी को दे गए । सुंदरबन क्षेत्र आज भी रहने के मामले भी बहुत कठिन क्षेत्र है जहां के निवासियों को विभिन्न प्रकार की कठिनाओ का सामना करना पड़ता है। तो उस समय उन सुंदरबन में कुछ चोरों और लूटेरों के अलावा कोई नहीं रहता था। महारानी ने उन लूटेरें परिवारों को मछली पालन के लिए प्रेरित किया और सुंदरबन में विभिन्न तालाबों का निर्माण कराया । जिससे उन लूटेरें परिवारों ने चोरों चाकरी छोड़ कर मछली पालन करना शुरू कर दिया । आज उन्ही लुटेरों के वंशज मछलीपालन कर सम्मान जनक जीवन यापन कर रहें है।


महारानी ने हुगली नदी पर निवास करने वालें मछुआरा समुदाय के लिए विभिन्न कार्य किए , वो स्वयं मछुआरा जाति से थी।


एक बार अंग्रेजों ने बंगाल में बहने वाली गंगा नदी में मछली पालन करने पर भारी भरकम टैक्स लगा दिया था जिससे वहां सदियों से मछली पकड़ कर जीवन यापन कर रहें लोगों पर संकट आ पड़ा , तब महारानी ने अंग्रेजों के नदी में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे अंग्रेजों का बहुत नुकसान हुआ और उन्होंने तुरंत वो टैक्स वापस ले लिया। महारानी राशमोनी को गरीब जनता का अपार समर्थन प्राप्त था , नही तो अंग्रेजों के शासन में अंग्रेजों का विरोध करने की के विषय में कोई सोच भी नही सकता था। 


कहते हैं की माता काली ने भवतारिणी रूप में महारानी को स्वप्न में दर्शन दिए , जिसके बाद उन्होनें हुगली नदी के किनारे विशाल व भव्य दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण कराया । ये मंदिर आज विश्वभर में प्रसिद्ध है।  


दक्षिणेश्वर माली मंदिर कोलकाता रासमणि
दक्षिणेश्वर माली मंदिर कोलकाता 


भारत सरकार ने जलवंशियों के लिए किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए 5 गस्त लगाने वाले जहाजों के बेड़े को रानी रशमोनी के नाम से  कोस्ट गार्ड में शामिल किया गया है। बंगाल में आज भी लोग महारानी राशमोनी का नाम सम्मान के साथ लेते हैं । परन्तु कश्यप समाज शायद आज ऐसी महान हस्ती को भुला चूका हैं।  नमन है ऐसी महान व्यक्ति को । 🙏


कोस्ट गॉर्ड में शामिल रानी रशमोनी गस्ती जहाज
कोस्ट गॉर्ड में शामिल रानी रशमोनी गस्ती जहाज 

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